श्री शिव महापुराण कथा आठवां खंड अध्याय 3



ब्रह्मा जी बोले हे पुत्र मैंने नीलकंठ शिवलिंग का जहां वर्णन किया है उसके दक्षिण की ओर अत्रि ईश्वर नमक शिव जी का लिंग विराजमान है वह लिंग मधुबन में स्थित है हमारे पुत्र श्री ने जिसकी पत्नी का नाम अनसूया है चित्रकूट पर्वत पर अपनी पत्नी सहित शिव जी का ध्यान धरकर घोर तपस्या की थी उन्हीं दिनों ऐसा अकाल पड़ा की 100 वर्ष तक संसार में पानी नहीं बस बर्स इसलिए सब ऋषि मुनि तथा सांसारिक प्राणी दुखी हो गए उसे अवस्था में दिनों दिन अशुभ कार्य घटने लगे तथा अकर्मो की वृद्धि होने लगी संसार की ऐसी दशा को देखकर अनसूया नेत्री से यह कहा है पति अब कोई ऐसा उपाय कीजिए जिससे जल की वर्षा हो और संसार को आनंद प्राप्त हो वस्तु यात्री मुनि उसे समय शिव जी के ध्यान में मग्न थे अस्तु उन्हें अनसूया के शब्द सुनाई नहीं पड़े उसे समय हम सूर्य देवता पूर्वक पार्थ इन पूजन करने लगी हे नारद अनसूया के ताप से प्रसन्न होकर शिवजी उसके सम्मुख प्रकट हुए उसे समय शिव जी का दर्शन प्राप्त करने के हेतु सभी देवता तथा ऋषि मुनि उसी स्थान पर पहुंचे अत्री और अनसूया की उसे तपस्या तथा सौभाग्य देखकर सब लोगों को अत्यंत आश्चर्य हुआ और इस विष्णु जी आदि शब्द होता होने एक स्वर से यह शोभित किया कि ताप एवं उपासना के निर्माता शिवजी से अधिक श्रेष्ठ अन्य कोई नहीं है वेद ने भी यही बात कही तक पहुंचा सब देवता आदि तो अपने-अपने स्थान को चले गए परंतु शिवजी वहीं स्थित रहे शिव जी के कारण गंगा भी वहीं रह गई इस प्रकार अत्रि मुनि को तपस्या करते हुए 54 वर्ष का समय और व्यतीत हो गया एक दिन अत्रि मुनि ने अपने ज्ञान को छोड़कर अनसूया से जल मांगा तब अनसूया का मंडली हाथ में लेकर जल प्राप्त करने के लिए वन में इधर-उधर भ्रमण करने लगी उसे समय अनसूया को चिंतित देखकर गंगा ने उसके समीप पहुंचकर यह कहा है अनसूया भला यह तो बताओ कि तुम कहां जा रही हो हे नारद गंगा के मुख से ऐसे वचन सुनकर अनुसूया ने प्रसन्न होकर पूछा है बहन तुम कौन हो और किस लिए खड़ी हो तुम्हें देखने से मेरे हृदय में अत्यंत प्रतीत उत्पन्न हुई है इसलिए तुम मेरे अपना सब वृतांत बताओ उसे समय गंगा ने उत्तर दिया है अनसूया मेरा नाम गंगा है और मैं तुम्हारे अधीन हूं आप तुम्हें जो चाहिए वह और मुझसे मांग लो यह सुनकर अनुसूया ने कहा है गंजे यदि ऐसी बात है तो तुम यहीं रहो और मुझे अपने पति के लिए जल प्रदान करो हे नारद यह सुनकर गंगा वही स्थिति हो गई दादू प्रांत उन्होंने अनसूया के को मंडल को जल से भर दिया अनसूया उसे जल को लेकर अत्री के पास जा पहुंची तब बद्री ने जल पीकर अनसूया से पूछा है प्रिया तुम यह जल कहां से लाई हो अनुसूया ने उन्हें सब हल्का सुनाया उसे वृत्तांत को सुनकर अत्रि मुनि अपने आसन से उठकर गंगा के समीप जा पहुंचे और वहां स्नान करके स्तुति करने लगी अनुसूया ने भी अत्यंत प्रसन्नता पूर्वक गंगा में स्थान किया उसे समय गंगा ने अत्री तथा अनसूया से इस प्रकार कहा तुम्हारी तपस्या पूर्ण हो चुकी है अस्तु अब मैं यहां से जाती हूं गंगा के ऐसे वचन सुनकर अत्री और अनुसूया ने उन्हें वहीं रहने की प्रार्थना की तब गंगा ने यह कहा कि यदि तुम मुझे एक वर्ष के शिव पूजन का फल प्रदान करो तो मैं यहां रह सकती हूं अनुसूया ने इस बात को स्वीकार कर लिया तथा गंगा वहीं स्थित हो गई इस समय शिवजी भी अपने मुख्य कॉन सहित उसे स्थान पर प्रकट हो गई हे नारद शिव जी के दर्शन पाकर अत्रि तथा अनसूया अत्यंत प्रशांत हुए और प्रार्थना करते हुए यह कहने लगे हे प्रभु आप यही परिस्थित रहिए अत्री की प्रार्थना स्वीकार कर शिवजी गंगा सहित उसे लिंग में स्थित हो गए इस स्थापना अत्री तथा अनुसूया ने की थी अत्री ने जो लिंग स्थापित किया था तथा गंगा वही स्थिति हो गई उसे समय शिवजी भी अपने मुख चिन्ह सहित उसे स्थान पर प्रकट हो गए हे नारद शिवजी के दर्शन पाकर रात्रि तथा अनुसुइया अत्यंत प्रशांत हुए और प्रार्थना करते हुए कहने लग हे प्रभु आप यहीं पर स्थित रहिए अत्री की प्रार्थना स्वीकार कर शिवजी गंगा सहित उसे लिंग में स्थापित हो गए उसकी स्थापना अत्री तथा अनुसूया ने की थी अत्री ने जो लिंग स्थापित किया था वह हाटीश्वर शिवलिंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ तथा गंगा मंदाकिनी नाम से विख्यात हुई तथा अनेक ऋषि मुनि अपने परिवार सहित इस स्थान पर ए रहने लगे शिवजी की कृपा से इस समय संसार में बड़े जोर की वर्षा हुई जिसे सब प्राणियों को आनंद प्राप्त हुआ जो मनुष्य अदृश्य स्वर शिवलिंग के दर्शन करता है उसके सब मनोरथ पूर्ण होते हैं

TRANSLATE IN ENGLISH 

Brahma Ji said, O son, to the south of the place where I have described Neelkanth Shivling, there is a Shivling named Atri Ishwar. That Linga is situated in Madhuban. Our son Shri, whose wife's name is Anasuya, had performed severe penance by meditating on Lord Shiva along with his wife on Chitrakoot mountain. During those days, there was such a famine that for 100 years, there was no water in the world. Therefore, all the sages, saints and worldly beings became sad. In that condition, inauspicious deeds started happening day by day and inactions started increasing. Seeing such a condition of the world, Anasuya said to Netri, "Husband, now do something so that it rains and the world gets happiness." At that time, the traveler sage was engrossed in the meditation of Lord Shiva. Therefore, he could not hear Anasuya's words. At that time, Parth, the Sun God, started worshipping him. Pleased with Anasuya's penance, Lord Shiva appeared in front of her. At that time, all the gods and sages reached the same place to get the darshan of Lord Shiva. Atri and Anasuya performed penance and were fortunate to have it. On seeing this all the people were very surprised and on hearing this the words Vishnu Ji etc. were uttered in one voice that there is no one greater than Shiva Ji, the creator of penance and worship. Vedas also said the same thing. All the gods etc. went to their respective places but Shiva Ji remained there. Because of Shiva Ji Ganga also remained there. In this way 54 more years passed while Atri Muni was doing penance. One day Atri Muni leaving his knowledge asked for water from Anasuya. Then Anasuya took the bundle of water in her hand and started roaming here and there in the forest to get water. Seeing Anasuya worried, Ganga came near her and said this Anasuya, tell me where are you going O Narada. On hearing such words from Ganga's mouth Anusuya got happy and asked, sister who are you and why are you standing here. On seeing you a very deep desire has arisen in my heart. Therefore you tell me your whole story. To this Ganga replied, Anasuya my name is Ganga and I am under your control. Ask me for whatever you want from me. On hearing this Anusuya She said, "Gandhi, if that is the case then you stay here and give me water for your husband." O Narada. Hearing this, Ganga became like that. He filled Anasuya's circle with water. Anasuya took that water and reached Atri. Then Badri drank the water and asked Anasuya, "Dear, from where have you brought this water?" Anusuya narrated everything to her. Hearing that story, Atri Muni got up from his seat and went near Ganga and after taking bath there, started praying. Anusuya also took bath in Ganga with great pleasure. At that time, Ganga said to Atri and Anasuya, "Your penance is complete, so now I am leaving from here." Hearing such words of Ganga, Atri and Anusuya requested her to stay there. Then Ganga said, "If you give me the fruit of one year's Shiv worship, then I can stay here." Anusuya accepted this and Ganga settled there. At that time, Shivji also appeared at that place along with his main chariot. O Narada. On getting the darshan of Shivji, Atri And Anasuya became very peaceful and while praying she said, O Lord, you stay here. Accepting Atri's prayer, Shiva along with Ganga got situated in the Linga. This installation was done by Atri and Anasuya. The Linga that Atri had installed and Ganga got situated there. At that time Shiva also appeared at that place with his face mark. On getting the darshan of Narad Shiva, Ratri and Anasuya became very peaceful and while praying she said, O Lord, you stay here. Accepting Atri's prayer, Shiva along with Ganga got situated in the Linga. This installation was done by Atri and Anasuya. The Linga that Atri had installed became famous by the name of Hatishwar Shivaling and Ganga became famous by the name of Mandakini and many sages and saints started living at this place with their families. By the grace of Shiva, at that time there was heavy rainfall in the world due to which all the creatures got happiness. The person who sees the invisible voice Shivaling, all his wishes are fulfilled.

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