मैं पृथ्वी में प्रविष्ट होकर अपने उसे बोल से जो की कामना और शक्ति से रहित मेरा ऐश्वर्य…
उत्कृष्ट आक्रमण करते हुए अर्थात पहले प्राप्त किए शरीर को छोड़कर जाते हुए तथा शरीर में …
इसका स्वरूप जैसा यह वर्णन किया गया है वैसा उपलब्ध नहीं होता क्योंकि यह स्वप्रभ की वस्त…
क्योंकि कर्म करने वाला का कर्म फल और ज्ञानियों का ज्ञान फल मेरे अधीन है इसलिए जो भक्त …
जो मन और अपमान में समान अर्थात निराकार रहता है तथा मित्र और शत्रु पक्ष के लिए तुल्य है…
हे प्रभु में पूर्व वनीत तीनों गुना से अतीत पर हुआ पुरुष किन-किन लक्षणों से युक्त होता …
जब इस शरीर के समस्त द्वारा में यानी आत्मा की उपलब्धि के द्वारा भूत वह श्रोता आदि सब इं…
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