सातवें अध्याय में ईश्वर दो प्रकृतियां बतलाई गई है पहले आठ प्रकार के विभक्ति त्रिकोण आद…
तथा जो सदा ही संतुष्ट है अर्थात स्थिति के कारण स्वरूप पदार्थ की लाभ हानि में जिसके जो …
परंतु यदि तू ऐसा करने में भी अर्थात जैसा ऊपर कहा है उसे प्रकार मेरे लिए कम करने के पार…
उनको क्लेश अधिकतर होता है यद्यपि मेरे लिए ही कर्म आदि करने में लगे हुए साधकों को भी बह…
दूसरे अध्ययन से लेकर विभूति योग तक अर्थात दसवें अध्याय तक समस्त विश्लेषकों से रहित अक्…
मैं आपको वैसे ही था पहले की भांति सर पर मुकुट धारण किए हाथों में गधा और चक्र किए हुए द…
आपको आगे से अर्थात पूर्व दिशा में और पश्चिम से भी नमस्कार है यह स्वर्ग रूप आपको सब और …
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