इसलिए तू हर समय मेरा स्मरण कर और शास्त्र ज्ञान अनुसार स्वधर्म रूप युद्ध भी कर इस प्रका…
थे ब्रह्म ततापी कुर्ता अर्थ इत्यादि वर्षों से पूर्व अध्ययन भगवान ने अर्जुन के लिए प्रा…
इच्छा और द्वेष इन दोनों से जो उत्पन्न होता है उसका नाम इच्छा द्वेष समाधि है उसकी प्राण…
मेरे द्वारा स्थिर की हुई उसे श्रद्धा से युक्त हुआ वह इस देवता के स्वरूप की सेवा पूजा क…
घोड़े में बेकार रूप सात्विक राजस और तमाशा इन तीनों भावों से अर्थात उपयुक्त राग द्वेष औ…
मुझ परमेश्वर से भारत अतिरिक्त जगत का कारण अन्य कुछ भी नहीं है अर्थात माही जगत का एकमात…
इस लोग द्वारा छठे अध्याय के अंत में प्रार्थना की बीच की स्थापना करके फिर स्वयं ही ऐसा …
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