कर्मयोग जिसका उपाय है ऐसा जो यह सन्यास सहित ज्ञान निष्ठा रूप योग पूर्व के दो अध्याय मे…
जैसे प्रकाश स्वरूप अग्नि अपने साथ उत्पन्न हुए अंधकार रूप धोने से और दर्पण जैसे मिले से…
सभी प्राणी एवं ज्ञानवान भी अपने प्राकृतिक के अनुसार ही चेष्टा करते हैं अर्थात जो पूर्व…
यदि मैं कदाचित अलसी रहित सावधान होकर कर्मों में ना भर्तु तो है पथ ही मनुष्य सब प्रकार …
इस लोक में जो मनुष्य कर्माधिकारी होकर इस प्रकार ईश्वर द्वारा वेद और यातना पूर्वक चलाए …
परंतु है अर्जुन जो कर्मों का अधिकारी अज्ञानी ज्ञान इंद्रियों को मन से रोककर वादे हाथ इ…
कर्मों का आरंभ किए बिना अर्थात यज्ञ कर्म जो कि इस जन्म या जन्म अंतर में किए जाते हैं औ…
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