ब्रह्मा जी बोले हे नारद ऑफ़ माय मातंग यंग लिंग का वर्णन करता हूं एक बार कलयुग के आरंभ में मैं इच्छा की कि मुझे एक ऐसा यज्ञ करना चाहिए जिस धर्म की बुद्धि हो तथा संपूर्ण पाप नष्ट हो जाए अस्तु वैसा नीचे करके महेश विष्णु जी के समीप गया और उन्होंने अपना मनोरथ का सुनाया था दो प्रांत मैने उनसे यह प्रार्थना की कि आप मुझे कोई ऐसा स्थान बता दीजिए जो अत्यंत पवित्र तथा सुंदर हो और जहां जाकर मैं अपने यज्ञ को निर्वहन कर सकूं उसे समय विष्णु जी ने मुझे यह उत्तर दिया है ब्राह्मण चित्रकूट नमक जो सिद्ध पर्वत है उसे देखने मात्र से ही मनुष्य पाप रहित हो जाता है वहां मंदाकिनी नदी के बहती है जिसमें स्नान करने से संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं वह नदी पर्वत के बीच बहती हुई धनुष के समान प्रतीत होती है वह स्थान मुझे अत्यंत प्रिय है तुम वहां जाकर एक पूरी बसो और शिवलिंगों की स्थापना करो हम भी 12 अंगुल की प्रतिमा मूर्ति से प्रकट होकर तुम्हारे यज्ञ की विधि में स्थित रहेंगे हे ब्राह्मण त्रेता तथा द्वापर युग में हम संसार में अवतार लेकर संसार को आनंद प्रदान किया करते हैं वास्तु आगामी नेत्र युग में हम अपनी कर अंशु द्वारा चार रूप होकर राजा दशरथ के घर में अवतार लेंगे दंडकम में जाकर रामेश्वरम लिंग की स्थापना करेंगे तथा उसकी सेवा करके वरदान प्राप्त करेंगे तदुपरांत हम परिवार सहित रावण का वध करेंगे शिव जी की सेवा के बिना कोई कार्य पूरा नहीं होता यह बात हम तुमसे बिल्कुल सत्य कहते हैं अतः तुम्हें भी उचित है कि तुम सर्वप्रथम शिवलिंग की स्थापना करो तब प्रांत तत्पश्चात यज्ञ करना हे नारद विष्णु जी की आज्ञा अनुसार मैंने त्रिकूट पर्वत पर पहुंचकर शिवलिंग की स्थापना की तथा अपने सभी पुत्रों एवं देवताओं सहित उन लिंगों की बहुत प्रकार से पूजा तथा स्तुति कि उसे समय हमारी सेवा प्रसन्न होकर शिवजी ने वहां प्रगट होकर दर्शन दिए और यह कहा है ब्राह्मण तुम जो चाहे वह व हमसे मांग लो यह सुनकर मैं निवेदन किया है प्रभु आप मेरे ऊपर कृपा करके अपने पूर्वाह्न सहित इस लीग में स्थित रहे मैं यहां यज्ञ करना चाहता हूं तथा एक पूरी वासना चाहता हूं मेरी इच्छा है कि उसे पूरी के आप राजा हो और आपका यह लिंग मातंग यंग के नाम से प्रसिद्ध हो हे नारद मेरी इस प्रार्थना को शिव जी ने स्वीकार कर लिया तदुपरांत शिवजी उसे लिंग के भीतर प्रवेश कर गए तब मैंने उसे स्थान पर यज्ञ करके शिवजी के निर्माता एक पूरी बसई उसे पूरी देखने से ही संपूर्ण प्रार्थना हो जाते हैं मातंग यंत्र शिवजी उसे पूरी के राजा हुए और वह स्थान कैलाश के नाम से प्रसिद्ध हुआ मातंगिनी का घाट शिव गंगा के नाम से प्रसिद्ध हुआ वह स्नान करने से संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं जो मनुष्य प्रातः काल मटिंगनी में स्नान करके मातंग यदि शिवजी का पूजा करता है वह संपूर्ण मनोरथ को प्राप्त करता है तथा मृत्यु के उपरांत शिवलोक में जाता है हे नारद शंकर पर्वत में पूर्व दिशा की ओर जहां कोर्ट नमक परम पवित्र तीर्थ है वही कोटेश्वर नमक शिवलिंग स्थापित है उसे तीर्थ में स्थान करने से तथा कोटेश्वर लिंग के दर्शन सेवन एवं पूजन करने से संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं हे नारद चित्रकूट के दक्षिण और से कुछ आगे चलकर पश्चिम की ओर तुरकान नामक पर्वत है जहां गोदावरी नदी बहती रहती है उसे स्थान पर पशुपति नमक शिवलिंग स्थित है जो मनुष्य को धावरी में स्नान करने के उपरांत उसे लिंग का पूजन करता है वह संसार में सदैव प्रसन्न बना रहता है रामचंद्र जी ने भी गोदावरी में स्थान करने के उपरांत पशुपति लिंग का पूजन किया था हे नारद उक्त स्थान से दक्षिण की ओर कलानगर नामक पर्वत है वह तीनों लोक में प्रसिद्ध है और वहां बहुत से लोगों ने तपस्या करके सिद्ध प्राप्त की है वह मुक्तेश्वर क्षेत्र नामक स्थान है जो संपूर्ण पापों को नष्ट करके अत्यंत आनंद प्रदान करता है उसे स्थान पर नीलकंठ नमक शिव जी का लिंक है जिसे देखने से ही संपूर्ण मनोकामनाएं सीट होती है वहां शिवजी गिरजा सहित विराजमान रहते हैं उसे लिंग की पूजा करके देवता मुनी तथा सिद्ध आदि ने परम पद प्राप्त किया है
TRANSLATE IN ENGLISH
Brahma Ji said, O Narada of my Matang, I am describing the young yagya. Once at the beginning of Kaliyug, I wished that I should perform such a yagya which gives wisdom of religion and destroys all sins. So doing so, Mahesh went to Vishnu Ji and told him about my desire. I prayed to him to tell me a place which is very holy and beautiful and where I can go and perform my yagya. At that time, Vishnu Ji gave me this answer. Brahmin, Chitrakoot is a Siddha mountain. By just seeing it, a man becomes free from sins. Mandakini river flows there. By taking a bath in it, all sins are destroyed. That river appears like a bow flowing between the mountains. That place is very dear to me. You go there and build a temple and establish Shivlings. We will also appear from the 12-inch idol and stay in the ritual of your yagya. O Brahmin, in Treta and Dwapar Yug, we take incarnation in the world and give joy to the world. In the coming Netra Yug, we will take incarnation in the house of King Dasharath by taking four forms through our hand. Dandakam I will go to Rameshwaram and establish the Linga and by serving it, will get a boon. Thereafter, we will kill Ravana along with our family. No work is complete without serving Shiva. We are telling you this with absolute truth. Hence, it is appropriate for you to first establish the Shivling and then perform the Yagya. O Narada, as per the order of Vishnu Ji, I reached the Trikuta Mountain and established the Shivling and, along with all my sons and Gods, worshipped and praised those Lingas in many ways. Pleased with our service, Lord Shiva appeared there and gave darshan and said, "Brahmin, ask for whatever you want from me." On hearing this, I have requested, Lord, kindly bless me and stay in this Linga with your forefinger. I want to perform the Yagya here and want a complete wish. I wish that after fulfilling it, you become the king and this Linga of yours should become famous by the name of Matang Linga. O Narada, Lord Shiva accepted my prayer. Thereafter, Lord Shiva entered that Linga. Then I performed the Yagya at that place and completed the prayer. The creator of Shivaji became a complete saint. By seeing it, I completed my prayer. Matang Yantra Shiva became the king of that place and that place became famous as Kailash. The Ghat of Matangini became famous as Shiv Ganga. By taking bath there, all sins are destroyed. The person who takes bath in Matangini in the morning and worships Matang Shiva, he gets all his wishes fulfilled and after death goes to Shivlok. O Narada, in the east direction of Shankar mountain, where there is a most sacred pilgrimage named Koteshwar, a Shivling named Koteshwar is established. By placing it in the pilgrimage and by visiting and worshipping the Koteshwar Linga, all sins are destroyed. O Narada, a little further to the south of Chitrakoot, towards the west, there is a mountain named Turkan, where the river Godavari flows. At that place, a Shivling named Pashupati is situated. The person who worships that Linga after taking bath in Dhavari remains happy in the world forever. Ramchandra ji also worshipped Pashupati Linga after taking bath in Godavari. O Narada, to the south of the said place, there is a mountain named Kalanagar, it is famous in all the three worlds and many people have done penance there. By doing this one has attained Siddhi. That place is called Mukteshwar Kshetra, which destroys all sins and gives immense bliss. There is a Linga of Lord Shiva named Neelkanth at that place. By seeing it all the desires are fulfilled. Lord Shiva resides there along with the temple. By worshipping that Linga, Gods, sages and Siddhas etc. have attained the ultimate position.
0 टिप्पणियाँ