श्री शिव महापुराण कथा आठवां खंड अध्याय 1 का भाग 2



जो व्यक्ति प्रभात के समय पवित्र होकर उन 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम लेता है उसके संपूर्ण मनोरथ पूर्ण होते हैं हे नारद इन ज्योतिर्लिंगों का प्रभाव तथा महिमा अप्राम्या है मोक्ष केवल चार प्रकार के व्यक्तियों को ही मिलता है वह यह है शिवजी के भक्त वेद पार्टी ज्ञानी तथा ध्यान ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से नपुंसक तथा पापी मनुष्य भी ब्राह्मण का जन्म पाकर मुक्त हो जाते हैं वास्तु ज्योति लिंगो का दर्शन से वन स्मरण तथा पूजन अवश्य करना चाहिए जब मैं तुमसे अपलिंगों का अलग-अलग वर्णन करता हूं पहले आंटी कैसे अथवा सोमेश्वरम उसी स्थान पर विराजमान है जहां महासागर नामक समुद्री स्थल है दूसरा रूद्र नामक अपलिंगी ब्रेक में है तीसरा ओपनिंग का नाम दुर्गेश्वरी द्वेष का कलमेश्वर पंचम का भूमि छतवान का गंगेश्वर साथ में का लोकनाथ आठवीं का त्र्यंबक तथा ट्रियन नाव का बैजनाथ दसवें का भूतेश्वर 11वीं का गुप्तेश्वर तथा 12वीं का मांग प्रेस प्रसिद्ध है इन अप लिंगों के दर्शन से मनुष्य को अत्यंत आनंद प्राप्त होता है हे नारद अब तुम उन शिवलिंगों का वर्णन सुनो जो पूर्व दिशा में तीर्थ है तीर्थराज प्रयाग में ब्रह्मा जी द्वारा स्थापित ब्रह्मेश्वर लिंग विराजमान है सोमेश्वर नमक शिवलिंग 10 में तीर्थ पर स्थित है भारत भाग्यायेश्वर तथा मध्यावेश नामक शिवलिंग शिव टैंक में स्थित है नागेश्वर नमक शिवलिंग सटतेश्वर नगर में है काशी में आओ मुक्तेश्वर के अतिरिक्त बल प्रीत बालेश्वर तिल मंडेश्वर दसमेश्वर मंडी खेतेश्वर तारकेश्वर गोदामेश्वर महाभूतेश्वर के धारेश्वर रामेश्वरम बूटी केश्वर पूरे स्वर तथा सिद्ध नागेश्वर नमक शिवलिंग भी विराजमान है प्रदेश में दुरुदेश तथा मिथड़ेश नामक शिवलिंग है वेदों ने जिसकी महिमा का वर्णन किया है उसे बैजनाथ धाम में नागेश्वर सिद्धेश्वर विदेश्वर कामेश्वर व्यास व्यास स्वर ज्ञानेश्वर ओंकारेश्वर कुंभ महेश्वर शुक्रेश्वर वेंकटेश्वर सूर्यवेश्वर भीमेश्वर भूतेश्वर ज्ञानेश्वर पूरे ईश्वर कोटेश्वर स्वप्नेश्वरी कंदमेश्वर तथा अचलेश्वर नमक शिवलिंग विराजमान है पुरुषोत्तम पुरी में भुवनेश्वर नमक शिवलिंग है वह अपने दर्शन करने वालों की संपूर्ण पृष्ठ का निवारण करते हैं वहां शिवजी अपने गुरु जगन्नाथ जी के बदले स्थित होकर सब लोगों को मनोकामना हो को पूर्ण करते हैं यह सब लिंग पूर्व दिशा में स्थित है

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The person who purifies himself in the morning and takes the name of those 12 Jyotirlingas, all his wishes are fulfilled. O Narada, the effect and glory of these Jyotirlingas is immeasurable. Only four types of people get salvation. They are the devotees of Lord Shiva, the Veda party, the knowledgeable and the meditative. By visiting the Jyotirlingas, even impotent and sinful men get liberated by taking the birth of a Brahmin. After visiting the Vastu Jyoti Lingas, one must remember the forest and worship it. When I describe the Applingas to you separately, first Aunty Kaise or Someshwaram is situated at the same place where there is a sea place called Mahasagar, the second Applingi named Rudra is in the break. The third Applinga is named Durgaeshwari, Dvesh, Kalmeshwar, fifth, Bhoomi, Chhatwan, Gangeshwar, along with Loknath, eighth, Tryambak and Trian Naav, Baijnath, tenth, Bhuteshwar, 11th, Gupteshwar and 12th, Mang Press are famous. By seeing these Applingas, a man gets immense pleasure. O Narada, now you describe those Shivlingas. Listen, the pilgrimage which is in the east direction, the Brahmeshwar ling established by Brahma ji is situated in Tirtharaj Prayag, a Shivling named Someshwar is situated at the pilgrimage in 10 Bharat, the Shivling named Bhagyayeshwar and Madhyavesh is situated in Shiv Tank, the Shivling named Nageshwar is in Satteshwar Nagar, come to Kashi, apart from Mukteshwar, Bal Preet Baleshwar Til Mandeshwar Dasmeshwar Mandi Kheteshwar Tarkeshwar Godameshwar Mahabhuteshwar's Dhareshwar Rameshwaram Booti Keshwar Pure Swar and Siddh Nageshwar Shivling are also situated, in the state there is a Shivling named Durudesh and Mithdesh, whose glory has been described in the Vedas, it is situated in Baijnath Dham, Nageshwar Siddheshwar Videshvar Kameshwar Vyas Vyas Swar Gyaneshwar Omkareshwar Kumbh Maheshwar Shukreshwar Venkateshwar Suryaveshwar Bhimeshwar Bhuteshwar Gyaneshwar Pure Ishwar Koteshwar Swapneshwari Kandameshwar and Achaleshwar Shivling are situated, in Purushottam Puri there is a Shivling named Bhubaneshwar, it relieves the entire pain of those who visit it, there Shivaji sits in place of his guru Jagannath ji and takes care of all the people. It fulfils the wishes of people. All these Lingas are situated in the east direction.

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