श्री शिव महापुराण कथा सातवां खंड अध्याय 58



ब्रह्मा जी ने कहा हे नारद आप मैं द्वादश ज्योतिर्लिंगों का वर्णन करता हूं जो लोग प्रातः काल उनका नाम लेते हैं उन्हें संपूर्ण सुख प्राप्त होते हैं शिवजी के 12 अवतार भक्तों के कल्याण में निर्मित पृथ्वी पर हुए थे फिर यह ज्योतिर्लिंगों के नाम से प्रसिद्ध हुए इन ज्योतिर्लिंगों के नाम इस प्रकार है पहले सोमनाथ दूसरा मल्लिकार्जुन तीसरा महाकाल चौथ ओंकारनाथ पांचवा केदारनाथ छतवान भीमाशंकर सातवां विश्वेश्वर आठवां त्रंबकेश्वर नया बैजनाथ धाम दसवां नागेश्वर 11वां रामेश्वरम 12 घृणिकेश्वर है हे नारद इन भारत अवतारों की अपार महिमा है अब तुम इन ज्योति लिंगो का वृतांत सुनो पहले सोमनाथ सौराष्ट्र नगर में रहते हैं दक्ष प्रजापति के शराब के कारण जब चंद्रमा का प्रकाश छीण हो गया तब उसे सोमनाथ शिवलिंग की स्थापना की गई थी उसने स्मरण ध्यान एवं पूजन से सब प्रकार के दुख तथा शोक नष्ट हो जाते हैं वहीं पर चंद्रकुंड नामक एक कुंड है जो स्नान करने से संपूर्ण पापों का नष्ट कर देता है हे नारद दूसरे मल्लिका अर्जुन श्रीनगर में प्रतिष्ठित है शिवजी अपने पुत्र इस कांड को लेने के लिए उसी स्थान पर पहुंचे थे और वही ज्योति लिंग होकर स्थित हो गए थे उसे ज्योतिर्लिंग के पूजन दर्शन तथा सेवन से अनेक प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं हे नारद तीसरा महाकाल उज्जैनी में विराजमान है उन्होंने दुष्ट नामक दैत्य के भस्म करने अपने भक्तों की रक्षा की थी और उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग बनाकर प्रतिष्ठित हो गए उसका दर्शन सेवन तथा पूजन में दोनों लोग में आनंद प्राप्त करने वाला है हे नारद चौथा ओंकारनाथ विंध्याचल पर्वत पर प्रतिष्ठित है हुए मुक्ति और भक्ति को प्रदान करने वाले हैं उनके दर्शन से बड़े-बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं

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Brahma Ji said, O Narada, I am describing the twelve Jyotirlingas to you. Those who take their name in the morning get complete happiness. 12 incarnations of Shiva were created on earth for the welfare of the devotees, then they became famous with the name of Jyotirlingas. The names of these Jyotirlingas are as follows. First Somnath, second Mallikarjun, third Mahakal, fourth Omkarnath, fifth Kedarnath, Chhatwan Bhimashankar, seventh Vishweshwar, eighth Trimbakeshwar, new Baijnath Dham, tenth Nageshwar, 11th Rameshwaram, 12th Ghrinikeshwar. O Narada, these Bharat incarnations have immense glory. Now listen to the story of these Jyoti Lingas. First Somnath lived in Saurashtra city. When the light of the moon was diminished due to the alcoholism of Daksh Prajapati, then Somnath Shivling was established there. By remembering, meditating and worshipping it, all kinds of sorrows and grief are destroyed. There is a pond named Chandrakund at the same place, bathing in which destroys all sins. O Narada, second Mallika Arjun Srinagar. It is established in the Jyotirlinga. Lord Shiva had reached the same place to take his son and he got situated there in the form of Jyoti Linga. Many kinds of happiness are attained by worshipping, seeing and consuming the Jyotirlinga. O Narada. The third Mahakal is seated in Ujjaini. He protected his devotees by burning down the demon named Dushta and became established by making a Jyotirlinga at the same place. His seeing, using and worshipping gives bliss to both the people. O Narada. The fourth Omkarnath is established on Vindhyachal mountain and he bestows salvation and devotion. Even the biggest sins are destroyed by his darshan.

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