श्री शिव महापुराण कथा सातवां खंड अध्ययन 58 का भाग 2



हे नारद पांचवी के धारेश्वर नारायण रूप से हिमाचल पर्वत के किरदार नामक स्थान में विराजमान है हुए भारत खंड के स्वामी है उसकी सेवा करने पर सभी शारीरिक सुखों को प्राप्ति होती है तथा पवित्र से अपवित्र प्राणी भी उनके दर्शन पाकर पवित्र हो जाता है हे नारद छठ में भीमाशंकर भी आद्री पर्वत पर विराजमान है उन्होंने अपने भक्तों की रक्षा से निर्मित भी नमक देते का संघार किया था उनका सेवन पूजन तथा दर्शन संपूर्ण आनंद मंगलो को देने वाला है हे नारद साथ में विश्वेश्वर काशी में विराजमान है हुए मुक्ति मुक्ति आदि संपूर्ण वस्तुओं को प्रदान करने वाले हैं उनका दर्शन एवं पूजन करने से परम पद प्राप्त होता है उसकी पूरी काशी में निवास करने वाला कोई भी प्राणी दरगाह में नहीं होती वह अपने भक्तों के संपूर्ण मनोकामनाओं को पूरी करते हैं हे नारद आठवें त्रांबक गौतमी नदी के तट पर विराजमान है उन्होंने गौतम के बाप को नष्ट करने के निर्माता अवतार लिया था उनके दर्शन से सब प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं हे नारद नमो बैजनाथ धाम चिंता भूमि में विराजमान है उन्होंने रावण की निर्माता अवतार ग्रहण किया था उनके दर्शन एवं पूजन से संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं तथा तीनों लोक में ऐश्वर्य प्राप्त होता है उसकी महिमा अनंत है हे नारद दशमी नागेश्वर जी दारू कनक में विराजमान है वह अपने भक्तों का पालन करके दूसरों को ठंड प्रदान करते हैं हे नारद 11 में रामेश्वरम सेतु बांध में विराजमान है उन्होंने रामचंद्र जी को शुभ प्रदान किया था तथा उनके प्रति के कारण वही स्थिति हुए जो कोई रामेश्वरम शिवलिंग को गंगाजल से स्नान करता है उसके संपूर्ण पाठ नष्ट हो जाते हैं हे नारद 12वीं गिरने के ईश्वर ज्योति लिंग की कथा इस प्रकार है दक्षिण दिशा में देवगिरी के समीप एक ग्राम में सुधा नामक एक ब्राह्मण रहता था उसे ब्राह्मण की दो पत्नियों थी उनमें से दूसरी पत्नी का नाम घूमा थ शिवजी की सेवा करने के कारण उसे एक पुत्र की प्राप्ति हुई परंतु पहले स्त्री ने सौतेली ठंड के कारण उसे बालक को मार डाला था यह देखकर शिवजी उसे स्थान पर प्रकट हुए और उन्हें मरे हुए बालक को जीवित कर दिया इस प्रकार उन्होंने अपनी सेविका घुमा को आनंद प्रदान किया जो व्यक्ति गिरने की ईश्वर शिवलिंग का दर्शन अथवा पूजन करता है उसके संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं यह नारद शिवजी के ज्योतिर्लिंगों की सेवा करके मनुष्य सब प्रकार के मनोरथ को प्राप्त कर सकता है इनका दर्शन सेवन तथा पूजन दोनों लोक में आनंद प्रदान करने वाला है जो इस चरित्र को सुनता पड़ता अथवा दूसरों को सुनता है उसे भी सब प्रकार का सुख प्राप्त होता है तथा उसके संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं इति श्री शिव पुराने ब्रह्मा नारद श्री भूषण सूत्र नंद सप्तम खंड समाप्ताहा

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O Narada, the fifth Dhareshwar Narayan is seated in a place called Kirdar in the Himachal mountain. He is the lord of Bharat Khand. By serving him, one gets all the physical pleasures and even the most impure creature becomes pure by seeing him. O Narada, Bhimshankar is also seated on Adri mountain in Chhath. He had also made a salt plate made by protecting his devotees. His consumption, worship and darshan gives complete happiness and auspiciousness. O Narada, along with him, Vishweshwar is seated in Kashi. He provides all the things like salvation, liberation etc. By seeing and worshipping him, one attains the supreme position. No creature residing in his entire Kashi goes to his dargah. He fulfils all the desires of his devotees. O Narada, the eighth Trambak is seated on the banks of Gautami river. He had taken the creator avatar to destroy Gautam's father. All types of sins are destroyed by seeing him. O Narada, Namo Baijnath is seated in Dham Chinta Bhoomi. He had taken the creator avatar of Ravana. All sins are destroyed by seeing and worshipping him. And one gets prosperity in all the three worlds, his glory is infinite. O Narada Dashami Nageshwar Ji is seated in Daru Kanak, he provides coolness to others by taking care of his devotees. O Narada 11th is seated in Rameshwaram Setu Dam, he had given auspiciousness to Ramchandra Ji and due to his devotion the same situation happened. Whoever bathes Rameshwaram Shivling with Gangajal, all his lessons are destroyed. O Narada 12th The story of Ishwar Jyoti Linga of Girna is as follows. In a village near Devgiri in the south direction, a Brahmin named Sudha lived. The Brahmin had two wives, out of which the second wife's name was Ghuma. Due to serving Shivji, he got a son, but the first wife killed his child due to step-motherly cold. Seeing this, Shivji appeared at that place and made the dead child alive. In this way, he gave joy to his maid Ghuma. The person who visits or worships Ishwar Shivling of Girna, all his sins are destroyed. This Narada, by serving the Jyotirlingas of Shivji, a man gets all kinds of benefits. One can fulfil his desires. Seeing and worshipping him provides happiness in both the worlds. Whoever listens to this story or makes others listen to it, also receives all kinds of happiness and all his sins are destroyed. Thus ends Shri Shiv, old Brahma, Narada, Shri Bhushan Sutra, Nanda, seventh section.

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