ब्रह्मा जी ने कहा हे नारद ऋषि मुनियों को विदा करने के उपरांत शिव जी ने यह इच्छा की की हम अर्जुन के समीप पहुंचकर उसे वर प्रदान करें उसे समय एक घटना घटी की दुर्योधन ने यज्ञ सुना की अर्जुन राज प्रताप के हेतु तपस्या कर रहे हैं तो उसने मोर नामक एक डेट को अर्जुन का संघार करने के लिए भेजा यह आदित्य पैसे का स्वरूप धारण कर अर्जुन के समय जा पहुंचा अर्जुन ने जब उसे दूर से ही अपनी ओर आते देखा तो मन में यह जान लिया कि निश्चय ही मेरा कोई शत्रु है और इसे दुर्योधन ने यहां भेजा होगा आज तो यह निश्चय कर अर्जुन ने उसे करने के लिए अपना धनुष बाण उठा लिया हे नारद जी समय अर्जुन हज भैंस को मारने की तैयारी कर रहे थे उसी समय शिवजी भूल पति का स्वरूप धारण कर अपनी गानों सहित अर्जुन की परीक्षा लेने तथा वरदान देने के लिए वहां पहुंचे हुए हाथ में धनुष भारतीय हुए थे दोस्तों जिस समय उसे भाई से रुपए देते नहीं यह इच्छा किया कि मैं अर्जुन को अपने सिंघम पर उठाकर मार डालूंगा इस समय भूल पति रूप शिवजी ने उसकी पूंछ पर अपनी बहन का ऐसा प्रहार किया कि वह बाढ़ शरीर में होता हुआ उसके मुख मार्ग से बाहर निकल गया जिसके कारण उसे देखकर की तत्काल ही मृत्यु हो गई जिस समय भूल पाती ने उसे स्थिति के ऊपर आपने बाढ़ का प्रहार किया था उसी समय अर्जुन ने भी उसके ऊपर अपना बढ़ चलाया था अतः जब उन्होंने डेट को पृथ्वी पर गिरते हुए देखा तो अपने मन में यह विचार किया कि आदित्य मेरे ही पहाड़ से मारा है आज तू है आपने मार को लेने के लिए शिव का नाम उच्चारण करते हुए उसे देखते के समीप जा पहुंचे उसे समय शिवजी का एक कारण भी अपने स्वामी का बाद लेने के लिए वहां पहुंच गए हे भारत उसे घर को देखकर अर्जुन ने कहा यह आदित्य हमारे बाद से मारा है आज तो इसको करने वाला बढ़ हमारा है और उसे प्राप्त करने का अधिकार भी हमें को है तब घर नहीं उत्तर दिया इस राक्षस को हमारे स्वामी भी पति ने मारा है इस प्रकार कुछ देर तक दोनों में बहुत विवाद हुआ परंतु अर्जुन ने बाढ़ स्वयं उठा लिया उसे समय शिव जी के गांड में इस प्रकार कहा तुम तपस्वियों का रूप धरकर ऐसा चल किस लिए करते हो एक बार के ऊपर तुम्हारा इस प्रकार लोग करना उचित नहीं है यह सुनकर अर्जुन बोली अरे मूर्ख तो यह क्या कह रहा है यह बढ़ मेरे मुख्य कॉन से युक्त है तू इसे देख ले और व्यर्थ की विवाद मत कर तब घर में यह उत्तर दिया अरे मूर्ख तो सच्चा तपस्वी नहीं है क्योंकि तब करने वाला कभी झूठ नहीं बोलना मेरा स्वामी परम तेजस्वी है और उसी का यह बाढ़ है यह तेरे पास कभी नहीं रह सकता मेरे स्वामी ने तेरे प्राण बचाने हेतु अपने इस बार द्वारा तेरे शत्रु का संघार किया और तू उसके उपकार को भूलकर ऐसी बातें कर रहा है हे नारद उस गांड के मुख से कैसे कठोर वचन सुनकर अर्जुन ने अत्यंत क्रुद्ध होकर कहा अरे नीचे तू बड़ा अहंकारी प्रतीत होता है जो हमसे ऐसे कठोर वचन कह रहा है हमें क्या आवश्यकता पड़ी है जो हम तेरे स्वामी के पास जाकर बाद मांगेंगे यदि उसे चाहिए तो वह हमारे बाढ़ मांग ले अन्यथा तू और तेरे स्वामी में से कोई भी हमारे साथ युद्ध कर ले उसे स्थिति में जो जीतेगा उसी को वह बाढ़ मिल जाएगा तो शीघ्र ही अपने स्वामी को हमारे पास बुला ला अर्जुन कैसे वचन सुनकर वह अगर आश्चर्यचकित हो शिवजी के समीप जा पहुंचा और उन्हें सब समाचार का सुनाया उसे समय शिव जी ने यह विचार किया कि हमें अर्जुन को तेज और शक्ति की परीक्षा लेनी चाहिए आज तो हुए अपने गानों सहित अर्जुन के समीप जा पहुंचे
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Brahma Ji said, O Narad. After bidding farewell to the sages and saints, Shiv Ji wished that he should go near Arjun and grant him a boon. At that time an incident happened that Duryodhan heard that Arjun is doing penance for his royal glory. So he sent a demon named Peacock to kill Arjun. This Aditya, taking the form of money, reached Arjun's place. When Arjun saw him coming towards him from a distance, he realized in his mind that there is definitely an enemy of mine and Duryodhan must have sent him here. Deciding this, Arjun picked up his bow and arrow to kill him. O Narad Ji, at that time Arjun was preparing to kill the buffalo. At that time Shiv Ji, taking the form of his husband, reached there with his sons to test Arjun and grant him a boon. Friends, at the time when he was not giving money to his brother, he wished that he would lift Arjun on his Singham and kill him. At that time, Shiv Ji, in the form of his husband, struck his tail in such a way that the bull went inside his body and came out from his mouth, due to which, seeing him, he When Bholapati had attacked him with her sword, at the same time Arjuna also used his sword on him, so when he saw the sword falling on the earth, he thought in his mind that Aditya has been killed by my mountain, today you have to take the sword and while chanting the name of Shiva, he went near him. At that time Shiva also reached there to take the sword of his master, O Bharat, seeing him, Arjun said, this Aditya has been killed by us, today the sword that has killed him is ours and we also have the right to get him. Then Bhola replied, this demon has been killed by our master, also, our husband. In this way, for some time, there was a lot of dispute between the two, but Arjun himself took the sword and said to Shiva, why do you do such things by taking the form of an ascetic, it is not right for you to do this more than once. Hearing this, Arjun said, hey fool, what are you saying, this sword is attached to my main weapon, you see it and do not argue unnecessarily. Then Bhola replied, hey fool is not a true ascetic because then One should never lie, my master is extremely brilliant and this sword is his, it can never stay with you, my master killed your enemy with his sword to save your life and you are forgetting his favor and saying such things, O Narada, on hearing such harsh words from that idiot, Arjun got extremely angry and said, hey you seem very arrogant, who is saying such harsh words to us, what do we need that we will go to your master and ask for the sword, if he wants it then he can ask for our sword, otherwise anyone among you and your master can fight with us, in that situation the one who wins will get the sword, so call your master to us soon, Arjun was surprised on hearing such words, he went near Shiv ji and told him the whole news, at that time Shiv ji thought that we should test Arjun's glory and strength, today he went near Arjun with his sword
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