ब्रह्मा जी बोले हे नारद अब तुम क्रीटेश्वर अवतार का वृतांत सुनाओ पूर्व काल में चंद्रवंश में यह अतीत नामक एक राजा हुआ उसके पांच पुत्र उत्पन्न हुए उनमें से पूर्व नामक सबसे छोटा पुत्र सेमेस्टर नमक रानी के गर्व से उत्पन्न हुआ था पूर्व ने राज प्रकार धरमपूर्वक अपनी प्रजा का पालन किया उसी के कुल में शांतनु नामक राजा उत्पन्न हुआ उसे राजा के गंगा तथा सरस्वती नामक दो पटरिया थी गंगा से जी पुत्र की उत्पत्ति हुई उनका नाम भीष्म था भीष्म बड़ा तपस्वी जितेंद्र तथा सत्यवादी था संतानों की दूसरी रानी सत्यवती के गर्व से चित्र अंगद तथा विचित्र वीर नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए उसमें से चित्रागत को चित्र घाट नमक के ही एक गंधर्व ने मार डाला जिसके कारण विचित्र वीर्य राजा का स्वामी हुआ हे नारद विचित्र वीर्य के दो रानियां थी वह उन्हीं के साथ भोग विलास किया करता था जिसके कारण उसे राज्य या क्षमता रोग हो गया अनेक उपाय करने पर भी राजा का वह रोग दूर ना हो सका और एक दिन उसकी निसंतान अवस्था से ही मृत्यु हो गई इस प्रकार राजा संतानों का वंश नष्ट हो गया बिहार जी ने विचित्र वीर्य केतु रानियां के घरों से संतान की उत्पत्ति की इनमें बड़ी रानियां के गर्व से धृतराष्ट्र उत्पन्न हुए जो जन्म से ही अंधे थे छोटे रनिया के घरों से पांडु का जन्म हुआ तीसरी बार राजा की दसवीं जब बिहार जी के समीप पहुंचे तो उसके घरों से भी दूर नमक विष्णु भक्त का जन्म हुआ इन तीनों बालकों को देखकर सरस्वती अत्यंत प्रसन्न हुई ब्याज जी द्वारा उत्पन्न तीनों बालक अत्यंत प्रतापी तथा धर्मात्मा हुए दृष्ट राष्ट्र का विवाह सुवाल की कन्या गांधारी के साथ हुआ था तथा राजा शूरसेन की पुत्री वासुदेव की बहन कुंती के साथ पांडु का विवाह हुआ पांडू की दूसरी रानी का नाम माधुरी था वह माधुरी देश के राजा की पुत्री थी हे नारद धृतराष्ट्र के दुर्योधन आदि 100 पुत्र उत्पन्न हुए तथा पांडु के युधिष्ठिर भीम अर्जुन नकुल और सहदेव के पंच पुत्र उत्पन्न हुए इनमें से पहले तीन पुत्र कुंती के घरों से उत्पन्न हुए थे तथा नकुल और सहदेव से माधुरी के घरों से जन्म लिया था राजा देवी की पुत्री 12 वार्षिक विवाह विदुर के साथ हुआ था उसने भी अनेक धर्मात्मा पुत्रों को जन्म दिया इन सब राजपुत्रो में भी अत्यंत बलवान था और वह अपने बल के कारण अनेक प्रकार के उपद्रव मचाया करता था दुर्योधन को भीष्म का स्वामी अच्छा नहीं लगता और वह सदा इस बार इस घाट में लग रहता था कि किसी उपाय से भी को मार डाला जाए इस प्रकार आरंभ से ही धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव तथा पांडव के पुत्र पांडव से शत्रुता हो गई दादू प्रांत एक दिन मंत्री के उपदेश से दृष्ट राष्ट्र ने पांडव को द्वारा घाट में लक्ष्मण भवन के भीतर जलाने के लिए भेजा परंतु शिवजी की कृपा एवं विदुर की संपत्ति से वे जीवित बच गए वहां से पांडव दक्षिण देश की ओर चले मार्ग में भीष्म व नामक नृत्य को मारा फिर ब्याज जी का उपदेश प्रकार सब पांडव चक्र पूर्व में रहने लगे द्रोपती के स्वयंवर का समाचार सुनकर वह अपनी माता कुंती सहित रजाधिपति के यहां गए वहां अर्जुन ने मत्स्य वेदना के उपरांत द्रोपती को जीत और सभी पांडवों के साथ द्रोपती का विवाह हुआ हे नारद पांडवों की वीरता का समाचार सुनकर राजा दृष्ट राष्ट्र ने उन्हें अपने पास बुला लिया और आधा राज देकर खंड प्राप्त में रहने की आज्ञा प्रदान की दादू प्राण अर्जुन तीर्थ पर्यटन करते हुए द्वारा में पहुंचे वहां उन्होंने श्री कृष्ण जी की सम्मति से सुभद्रा का हरण किया तथा उसके साथ अपना विवाह कर लिया इसी सुभद्रा के घरों से अभिमन्यु का जन्म हुआ था हे नारद अब मैं दूसरे प्रकार से अर्जुन के बाल का वर्णन करता हूं पूर्व समय में श्वेत की नामक एक राजा शिवाजी का परम भक्त था शिव जी ने उसकी सेवा से प्रसन्न होकर दुर्वासा ऋषि को याद आ जाती कि तुम जाकर राजा सुमित की का यज्ञ कर दो शिवजी किया गया अनुसार दुर्वासा ने उसे राजा का यज्ञ कराया वह यज्ञ ऐसा था कि 12 वर्ष तक निरंतर ग्रीट की धार यज्ञ की अग्नि में गिरती रही उसके कारण रागिनी अत्यंत तृप्त हो हरियाणवी के कारण निस्तेज हो गई उसे समय अग्नि ने मेरे पास आकर यह प्रार्थना की कि मैं अत्यंत व्याकुल हूं वस्तु आप मेरे अर्जुन को दूर करने का कोई उपाय कीजिए तब मेरी आज्ञा से अर्जुन तथा कृष्ण ने अग्नि को अपनी शरण में लेकर उसे खांडव वन जलाने की आज्ञा दी उसे वन में बाय नामक एक दानव रहा था उसे दानव को अर्जुन ने श्री कृष्ण की आज्ञा मानकर भगवान से भाग जाने दिया उसे उपकार के कारण मैदान होने पांडवों के लिए एक ऐसे सभा का निर्माण किया जिससे जल तथा थल का कोई भी भेद याद नहीं होता था जब दुर्योधन उसे सभा को देखने के लिए आया तो उसकी बुद्धि भ्रम में पड़ गई जिसके कारण दुर्योधन अत्यंत लज्जित हो गया और उसके हृदय में पांडवों का पुराना द्वेष फिर उभर आया है नारद उसे शत्रुता के कारण दुर्योधन ने जुआ खेल कर पांडवों के संपूर्ण राज्य तथा धन को जीत लिया यहां तक की उसकी पत्नी द्रोपती तक को हुए में जीत लिया था तो प्रांत दुर्योधन ने पांडवों को राजपूत करके 12 वर्ष के लिए अपने राज्य से बाहर निकाल दिया उसे स्थिति में सूर्य से द्रोपदी का हिस्सा बर्तन दिया जिसका द्वारा प्राप्त होने वाले भोजन से पांडव अपना कल क्षेत्र करते रहे
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Brahma Ji said, O Narada, now you tell the story of Kritiswara avatar. In ancient times, there was a king named Atit in the Chandravansh. He had five sons. Out of them, the youngest son named Purva was born from the womb of a queen named Semester. Purva ruled his subjects righteously. In his family, a king named Shantanu was born. He had two wives named Ganga and Saraswati. His son was born from Ganga. His name was Bhishma. Bhishma was a great ascetic, Jitendra and truthful. From the womb of the second queen Satyavati, two sons named Chitra Angad and Vichitra Veer were born. Out of them, Chitragat was killed by a Gandharva of Chitra Ghat, due to which Vichitra Veerya became the lord of the king. O Narada, Vichitra Veerya had two queens. He used to enjoy with them, due to which he got the disease of Rajya or Kshamta. Even after trying many remedies, the king could not be cured of that disease and one day he died due to childlessness. Thus, the lineage of the king's children was destroyed. Bihar Ji produced children from the houses of Vichitra Veerya Ketu's queens. The elder of these queens was Vichitra Veerya. Dhritarashtra was born from the pride of Dhritarashtra who was blind from birth. Pandu was born from the house of a younger queen. When the king's tenth wife reached Bihar for the third time, a Vishnu devotee was born far from his house. Saraswati was very pleased to see these three children. All the three children born to Byas were very majestic and virtuous. Drishtashtra was married to Gandhari, the daughter of Suwal and Pandu was married to Kunti, the sister of Vasudev, the daughter of King Shursen. The name of Pandu's second queen was Madhuri. Madhuri was the daughter of the king of the country. O Narada, Dhritarashtra had 100 sons like Duryodhan and Pandu had five sons named Yudhishthira, Bhima, Arjun, Nakul and Sahadev. Out of these, the first three sons were born from Kunti's house and Nakul and Sahadev were born from Madhuri's house. King Devi's daughter Vidur was married to her 12 year old daughter. She also gave birth to many virtuous sons. Among all these princes, he was very strong and He used to create many types of disturbances due to his strength. Duryodhan did not like Bhishma's husband and he was always busy in this ghat, in finding some way to kill him. Thus, from the very beginning, there was enmity between Dhritarashtra's sons Kauravas and Pandavas. One day, on the advice of the minister, Drisht Rashtra sent Pandavas to be burnt inside Lakshman's building at Dwara Ghat, but due to Shiva's grace and Vidur's wealth, they survived. From there, Pandavas went towards the south and on the way, they killed a dancer named Bhishma. Then, on the advice of Byaj ji, all the Pandavas started living in Chakravarti. On hearing the news of Draupadi's swayamvar, he along with his mother Kunti went to the king's place. There, Arjun won Draupadi after the Matsya Vedana, and Draupadi was married to all the Pandavas. O Narada, on hearing the news of Pandavas' valor, king Drisht Rashtra called them to him and gave them half the kingdom and allowed them to live in Khand Prapt. Dadu Pran Arjun while doing pilgrimage tourism When he reached there, he abducted Subhadra with the consent of Shri Krishna and married her. Abhimanyu was born from the house of this Subhadra. O Narada, now I describe Arjun's childhood in another way. In ancient times, a king named Shwetki was a great devotee of Shivaji. Pleased with his service, Shiva remembered sage Durvasa and told him to go and perform a yagya for king Sumit. According to Shiva's wish, Durvasa performed a yagya for the king. That yagya was such that for 12 years, the stream of water kept falling in the yagya fire continuously. Due to that, Ragini became very satisfied and became weak due to Haryanvi. At that time, Agni came to me and prayed that I am very restless, please find a way to get rid of my Arjun. Then, by my order, Arjun and Krishna took Agni under their protection and ordered him to burn the Khandav forest. There was a demon named Bai in that forest. Arjun, obeying the order of Shri Krishna, allowed that demon to run away from the Lord. Due to his favor, he was allowed to go to the battlefield. A court was constructed for the Pandavas in such a way that it could not distinguish between land and water. When Duryodhan came to see the court, his mind got confused due to which Duryodhan became very ashamed and the old hatred for the Pandavas emerged again in his heart. Due to enmity with Narada, Duryodhan won the entire kingdom and wealth of the Pandavas by gambling. He even won his wife Draupadi in gambling. So Duryodhan exiled the Pandavas from his kingdom for 12 years. In that situation, he gave Draupadi's share of utensils from the Sun. The Pandavas continued to do their work by eating food from them.
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