श्री शिव महापुराण कथा सातवां खंड अध्याय 51



ब्रह्मा जी बोले हे नारद अब मैं तुम्हें नरतकनट अवतार का वृतांत सुनाते हूं गिरजा को व देने के पश्चात शिवजी एक दिन नॉर्थ का नाटक का स्वरूप धारण कर हिमालय के घर गए वहां हिमालय तथा मैं को प्रसन्न कर उन्होंने भिक्षा के बदले गिरजा को मांगा पहले तो हिमालय में उसके ऊपर क्रोध किया परंतु जब उन्होंने यह ज्ञात हुआ कि यह शिवजी है तो उन्होंने गिरजा का विवाह उनके साथ करना स्वीकार कर लिया इस प्रकार शिवजी ने बड़ी लीलाएं करके गिरजा के साथ विवाह किया नृत का नट अवतार का चित्र भी भक्तों को आनंद प्रदान करने वाला है हे नारद जब महीना ने यह जान लिया कि शिवजी सबसे श्रेष्ठ तथा सबके स्वामी है तब उन्होंने शिव जी के साथ अपनी कन्या का विवाह कर देना उचित समझा उसे समय देवताओं ने परस्पर यह समझी कि की मेहनत तथा हिमाचल की श्रेष्ठ बुद्धि को किसी प्रकार नष्ट कर देना चाहिए इस प्रकार का निश्चय करके सब देवता पहले तो मेरे पास आए दादू प्रांत मेरी आज्ञा से शिव जी के पास जाकर यह कहने लगे हे प्रभु यदि हिमाचल आपको सदाशिव समझ कर गिरजा का विवाह करेगा तो वह इसी शरीर से आपके लोग को प्राप्त हो जाएगा उसे समय प्रार्थना आदि अद्भुत वस्तुएं कहां से प्राप्त करोगे ऐसी स्थिति में आप कोई ऐसा उपाय कीजिए जिससे उसका यह दिव्य ज्ञान नष्ट हो जाए देवताओं की यह प्रार्थना सुनकर शिवजी वैष्णव ब्राह्मण का स्वरूप धारण कर हिमाचल के पास गए और उसे इस प्रकार करने लगे हे राजन तुम राजा होकर शिव जैसे अद्भुत अवधूत के साथ अपने पुत्री का विवाह करने के लिए क्यों आतुर हो रहे हो तुम्हें ऐसा करना कदापि उचित नहीं है शिवजी अशुभ वेश्या धारी तथा मंगलो के घर है तब उन्होंने उनकी बात मानकर शिवजी के साथ अपनी पुत्री का विवाह न करना ही उचित समझा इस चरित्र को करने के उपरांत शिवजी का इलाज पर्वत पर लौट आए फिर वहां से उन्होंने सप्त ऋषियों को हिमाचल के पास समझाने बुझाने के लिए भेजा तब तब तो ऋषियों ने आकर हिमालय तथा महिला को बहुत समझाया बुझाया और गिरजा का विवाह शिव जी के साथ कराया दिया दिया अवतार किया कथा सुनने तथा सुनने से दोनों लोग में आनंद प्रदान करने वाली है

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Brahma Ji said O Narada, now I will tell you the story of Naratkanat avatar. After marrying Girja, one day Shiv Ji took the form of a dancer and went to Himalaya's house. There, after pleasing Himalaya and him, he asked for Girja in exchange of alms. At first Himalaya got angry at him, but when he came to know that it was Shiv Ji, he agreed to marry Girja to him. In this way, Shiv Ji performed great deeds and married Girja. The picture of the dancer avatar is also joyous to the devotees. O Narada, when Shiv Ji came to know that Shiv Ji is the best and the master of all, then he thought it appropriate to marry his daughter to Shiv Ji. At that time, the gods decided among themselves that the hard work and the great intellect of Himachal should be destroyed in some way. Having decided in this way, all the gods first came to me. Dadu province, with my order, went to Shiv Ji and said, O Lord, if Himachal marries Girja considering you as Sadashiv, then she will be attained by your people in this very body. From where will you get the wonderful things like time, prayers etc. for her? In such a situation, you can do anything. Find a way by which this divine knowledge of his gets destroyed. Hearing this prayer of the Gods, Shiv Ji took the form of a Vaishnav Brahmin and went to Himachal and started persuading him in this way, O King, being a king, why are you in such a hurry to marry your daughter to a wonderful Avdhoot like Shiv, it is not at all right for you to do so. Shiv Ji belongs to an inauspicious prostitute and the house of Mangals. Then he accepted their advice and thought it appropriate not to marry his daughter to Shiv Ji. After doing this act, Shiv Ji's treatment returned to the mountain. Then from there he sent Saptarshis to Himachal to convince him. Then the sages came and convinced Himalaya and the woman a lot and got Girja married to Shiv Ji. The story of Diya Avatar gave joy to both the people by listening to it.

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