ब्रह्मा जी ने कहा हे नारद आप मैं तुम्हें जटाधारी अवतार का वर्णन करता हूं जब गिरिजा माता- पिता से आ गया लेकर भगवान सदाशिव को पति रूप में प्राप्त करने की अभिलाषा से तपस्या करने के लिए वन में पहुंचे उसे समय शिव जी ने शब्द ऋषियों को गिरजा की परीक्षा लेने के निर्माता उसके समीप भेजा परंतु गिरजा उनके धोखे में किसी प्रकार नहीं आई तथा दीनतापूर्वक तपस्या में सारनाथ में बनी रही उसे समय शिवजी स्वयं गिरजा को देखने की इच्छा से जटाधारी ब्राह्मण का स्वरूप बनाकर उसके पास पहुंची वहां बहुत वार्तालाप एवं विवाद के उपरांत भी जब वह गिरजा को अपने डेड दिशा से नहीं दिखा सके तो उन्हें प्रसन्न होकर गिरजा को अपने मुख्य स्वरूप का दर्शन कराया तथा कहां है गिरजे तुम मुझे अत्यंत प्रिय हो भी आनंद मंगल को बढ़ाने वाले तथा कीर्ति बढ़ाने वाला है
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Brahma Ji said, O Narada, I will describe to you the Jatadhari avatar. When Girija came back from her parents and reached the forest to perform penance with the desire to get Lord Sadashiv as her husband, at that time Shiv Ji sent Shabd Rishis to test Girija, but Girija did not fall into their trap and continued with her penance in Sarnath with humility. At that time Shiv Ji himself, with the desire to see Girija, reached her in the form of a Jatadhari Brahmin. There, even after a lot of conversation and debate, when he could not show Girija from his side, then he got pleased and showed his main form to Girija and said, Girija, you are very dear to me and you increase happiness and auspiciousness and fame.
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