श्री शिव महापुराण कथा सातवां खंड अध्याय 48



ब्रह्मा जी बोले हे नारद अब में भिक्षनाथ अवतार का वृतांत सुनाते हूं पूर्व काल में 17th नामक एक राजा शिवाजी का परम भक्त हुआ वह विदर्भ देश में राज करता था एक दिन साल नामक राजा ने 17th पर चढ़ाई करके उसके नगर को घेर लिया उसे समय दोनों राजाओं में और युद्ध हुआ जिससे 17th पराजित होकर मृत्यु को प्राप्त हुआ उसकी रानी रात्रि के समय किसी प्रकार घर से बाहर निकल भागी मार्ग में चलते-चलते जब हुआ थक गई तब एक तालाब के सभी वृक्ष के नीचे बैठ गए उसी दिन शुभ लग्न में उसने एक पुत्र को जन्म दिया कुछ देर बाद जब उसे बड़ी जोर से प्यास लगी तो वह उसे बालक एवं उसे तालाब के तट पर पानी पीने के लिए जा पहुंचे वहां उसने एक फोटो भी पानी नहीं पिया था कि तभी एक ग्रह ने उसे पकड़ कर जंगल के भीतर खींच लिया हे नारद उसे समय शिव जी को उसे नवजात शिशु पर बड़ी दया आई तभी उन्होंने ऐसी लीला की की एक ब्राह्मण की स्त्री घूमती हुई उसे बालक के समय पर पहुंची इस स्त्री के साथ एक वर्ष की आयु का एक और भी बालक था जब उसने उसे स्थान पर उसे बालक को पड़ा हुआ देखा तो अत्यंत आचार्य में भरकर अपने मन मे यह विचार किया कि भलाई यह किसका बालक है इस प्रकार विचार करने के उपरांत जब उसने इधर-उधर बहुत दृष्टि दौड़ाही पर कोई भी स्त्री पुरुष दिखाई नहीं दिया तब उसने निश्चय किया कि मुझे इस बालक का अपने पुत्र के समान पालन करना चाहिए परंतु जब तक इसकी कुल का हल ज्ञात न हो जाए तब तक इसे हाथ लगाना उचित नहीं है हे नारद ब्रह्माणी को ऐसी चिंता में पड़े देखकर शिवजी एक वर्षों का रूप बनाकर वहां प्रकट हो गए और उसे ब्राह्मणी से बोले थे ब्रह्माणी तुम अपने मन मे किसी प्रकार का संदेह मत करो इसका पालन करने से तुम्हें सब प्रकार का आनंद प्राप्त होगा यह सुनकर इस स्त्री ने प्रसन्न होकर ही महान अनुभव मैं यहां चाहती हूं कि आप मुझे इसके जन्म तथा कर्म का वृतांत विस्तार पूर्वक सुना देने की कृपा करें

TRANSLATE IN ENGLISH 

Brahma Ji said O Narada, now I will narrate the story of Bhikshanath avatar. In ancient times, a king named 17th was a great devotee of Shivaji. He ruled in the country of Vidarbha. One day, a king named Saal attacked 17th and surrounded his city. At that time, a war took place between the two kings, due to which 17th was defeated and died. His queen somehow managed to escape from the house at night. When she got tired while walking on the road, they all sat under a tree near a pond. On the same day, on an auspicious day, she gave birth to a son. After some time, when she felt very thirsty, she and the child went to the bank of the pond to drink water. There, he had not drunk even a drop of water, when a planet caught him and pulled him inside the forest. O Narada, at that time, Shiva Ji felt pity for the new born baby. Then he did such a leela that a Brahmin woman, while roaming, reached the child at the time. Along with this woman, there was another child of one year of age. When she saw the child lying at that place, then filled with great joy, she thought in her mind that She wondered whose child was this. After thinking this way, she looked around a lot but could not see any man or woman, then she decided that she should raise this child like her own son, but until the history of his lineage is known, it is not right to touch him. O Narada, seeing Brahmaani worried in such a way, Lord Shiva appeared there in the form of a boy and told the Brahmini, Brahmaani, do not have any doubt in your mind, by raising him you will get all kinds of happiness. On hearing this the woman became happy and had a great experience. I want here that you please narrate to me the story of his birth and deeds in detail.

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