सूत जी ने कहा ही शौकत आदि ऋषि क्यों नारद जी इतनी कथा सुनकर ब्रह्मा जी से बोले हे पिता ही अध्यपी अपने शिव जी के अनेक चरित्र का वर्णन किया है तो मुझे तृप्ति नहीं होती है आज तो माया चाहता हूं कि आप अन्य शिवलिंगों की महिमा का वर्णन करने की कृपा करें यह सुनकर ब्रह्मा जी बोले ही पुत्र शिवलिंगों की कोई संख्या नहीं है लिंग से विभिन्न अन्य कोई वस्तु नहीं है तो भी मैं जहां तक अपनी बुद्धि के अनुसार समझा है और कुछ मुझे विष्णु जी के द्वारा ज्ञात हुआ है वह मैं तुम्हें बताता हूं हे नारद आकाश आंतरिक पृथ्वी तथा पाताल में शिव जी ने जहां कहीं किसी देवता मनुष्य अथवा डेट को अपना दर्शन दिया है वही हुए लिंक ग्रुप होकर स्थित हो गए हैं उन शिवलिंगों का पूजन करने से अंततः आनंद की प्राप्ति होती है इस पृथ्वी पर शिवजी के आसन के लिंग स्थापित है उनमें जो अत्यंत प्रसिद्ध तथा वर्णन करने योग्य है वही का वृतांत मैं तुमसे कहता हूं उन लिंगों में भी जो बड़े तथा अधिक श्रेष्ठ है उन्हें ज्योर्तिलिंग कहा जाता है ज्योतिर्लिंगों में शिवजी पूर्ण अंश से विराजमान रहते हैं उन ज्योतिर्लिंगों का वृतांत 30 प्रकार है पहले सोमनाथ सौराष्ट्र में गिरजा सहित विराजमान है दूसरे मल्लिका अर्जुन श्री सेल पर स्थित है तीसरे महाकाल उज्जैन में सुशोभित है चौथे अमरनाथ हिमालय पर्वत पर स्थित है पांचवी के धारेश्वर केदार नाथ स्थान में सुशोभित है छठवें भीमाशंकर डंकिनी तीर्थ स्थल पर स्थित है साथ में विश्वनाथ काशी में विराजमान आदमी त्रांबक गौतमी नदी के तट पर स्थित है 90 बैजनाथ चिंता भूमि में निवास करते हैं दसवीं नागेश दारु को वन में सुशोभित हे 11वां रामेश्वरम सेतु के ऊपर निवास करते हैं तथा 12वीं घुतिमान शिव ग्रह में विराजमान है
TRANSLATE IN ENGLISH
Sut ji said Shaukat etc. Rishi, why? Narad ji, after listening to so much story, said to Brahma ji, O father, you have already described many characters of Shiv ji, but I am not satisfied. Today, I want you to be kind enough to describe the glory of other Shivlings. On hearing this, Brahma ji said, son, there is no number of Shivlings, there is no other thing apart from the Linga, still, as far as I have understood according to my intelligence and whatever I have come to know from Vishnu ji, I am telling you that, O Narad, wherever Shiv ji has given his darshan to any deity, human or god in the sky, inner earth and underworld, he has become linked and settled there. By worshipping those Shivlings, one ultimately attains bliss. On this earth, the Lingas of Shiv ji's seat are established, among them the one which is very famous and worth describing, I am telling you the story of that only. Among those Lingas, the bigger and the best ones are called Jyotirlingas. In Jyotirlingas, Shiv ji resides in full form. The story of those Jyotirlingas is of 30 types. Somnath is seated in Saurashtra along with the church, second Mallika is situated on Arjun Shri Cell, third Mahakal is adorned in Ujjain, fourth Amarnath is situated on the Himalayan mountains, fifth Dhareshwar is adorned in Kedar Nath place, sixth Bhimashankar is situated at Dankini pilgrimage site, along with Vishwanath is seated in Kashi, Trambak is situated on the banks of Gautami river, 90 Baijnath resides in Chinta Bhoomi, tenth Nagesh is adorned in Daru forest, 11th Rameswaram resides on top of the bridge and 12th is seated in Ghutiman Shiv planet.
0 टिप्पणियाँ