हे नारद 23 में दुआ पर युग में ट्रेन बिंदुओं ने बिहार जी का जन्म लिया और उन्होंने वेद के विवाह करके पुराने की रचना की अपने मत को सिद्ध होते ना देखा जब उन्होंने शिवजी से सहायता मांगी तो शिवजी ने कलिंज नामक पर्वत पर महाकाव्य सूत्र नमक अवतार लिया उसे समय उनके शिष्यों के नाम औषधि दृढ़ अध्यक्ष डावल तथा काव्य थे शिवजी ने इस शिशुओं की सहायता से ब्याज जी के मत को प्रसिद्ध किया हेमारत 24 में द्वापर युग में को शरीक उन्होंने वाल्मीकि भी कहा जाता है वह बिहार का जन्म लिया उन्होंने वेद के विवाह करके पुराने को प्रकट किया तब उन्हें अपने मत को फैलाने में सफलता नहीं मिली तो उन्होंने शिवजी की स्तुति करते हुए उनसे सहायता की याचना की उन सब शिव जी ने भी नमक मोहन में सूली नमक अवतार ग्रहण किया और व्यास जी की मनोकामना को पूर्ण किया उसके शिष्यों के नाम साली गोत्र सहज होते सुहनवास तथा शुरू हुआ थे उन्हें ब्याज जी ने श्री रामचंद्र जी के लीला चरित्र का वर्णन किया है हे नारद 25 में द्वापर युग में ब्रह्मा शब्द में व्यास जी का जन्म लिया और शिवजी का तप करके उनसे अपने मत का प्रचार करने में सहायता करने की प्रार्थना की उन्होंने पेट की विभाग करके पुराने को बनाया था परंतु जब उनके मौत को सांसारिक लोगों ने स्वीकार नहीं किया तो वह अत्यंत निराश हुए उसे समय शिव जी ने दांडी मंडी नमक अवतार ग्रहण किया उनके शिष्यों के नाम बहुल कोकण कुंभ तथा प्रभात थे इन्हीं की सहायता से उन्हें संसार में पुराने की प्रतिष्ठा कराई तथा सांसारिक मनुष्यों को योग मार्ग का उपदेश दिया इन 25 में बिहार जी के पुत्र का ही नाम उपमन्यु था उसने बलियावस्था से ही शिवजी की बड़ी भक्ति की थी हे नाथ 26 में द्वापर युग में पाराशर ने ब्याज जी का जन्म लिए हुए मेरे पुत्र तथा बसेपन के पिता थे उनके सामान शिवजी का परम भक्त अन्य कोई नहीं हुआ उन्होंने वेद के कर विभाग करके 18 पुराने का निर्माण किया या उनके मत का प्रचार संसार में नहीं हुआ तब उन्होंने भगवान सदाशिव से सहायता की याचना की उसे समय शिव जी ने दयाल होकर उनकी मनोकामना पूर्ण करने के हेतु आशा विष्णु नाम से अवतार लिया और भद्र नाटक नामक नगर में प्रतिष्ठा हुए उनके शिष्य के नाम वसूल बिंदु समान तथा वसुल्लम थे इन सब चीजों में शिवजी की आज्ञा से ब्याह जी की सहायता की और उनके मत को संसार में प्रज्वलित किया हे नारद 27 में द्वापर युग में ज्ञान कांड में व्यास जी का जन्म लिया तथा वेद के विवाह करके पुराने की रचना की फिर अपने मत को प्रज्वलित होते हुए ना देखकर उन्होंने शिवजी की स्तुति कि उसे समय शिव जी ने प्रभात क्षेत्र में साहुकर्म नाम से अवतार लिया उनके शिष्यों के नाम अक्षय पद स मन्नू कुमार ब्लॉक तथा उत्साह थे सौभाग्य कर्म रूपी शिवजी के अवतार के योग शास्त्र को प्रकट कर पुराण के महत्व को प्रज्वलित किया तथा द्वितीय धर्म को ग्रीन किया जब व्यास जी ने यह देखा कि आप कोई भी मनुष्य उसके मत का विरोधी नहीं है तो उन्हें अध्ययन प्रसन्न होकर शिवजी की स्तुति की तादाद उपरांत संसार भर में बिहारी और उसके शिष्यों का इतिहास फैल गया है भारत इस प्रकार द्वापर युग में जो शिवजी के साथ 23 में अवतार हुए उनका वर्णन मैं तुमसे किया अब तुम उसे अवतार के बारे में सुनो जिसे शिवजी ने कलयुग के प्रारंभ में दिया था हे पुत्र शिव जी के इन अवतारों की कथा को जो मनुष्य मन लगाकर सुनता अथवा दूसरों को सुनता है वह दोनों लोग में सब प्रकार का आनंद प्राप्त करता है
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Hey Narada, in the 23rd Dua Yuga, the great Bindus took birth as Bihari and he composed the Purana by marrying the Vedas. He did not see his opinion being proved. When he asked for help from Lord Shiva, then Shiva took the form of the epic Sutra on a mountain called Kalinja. At that time the names of his disciples were Aushdhi, Dridha, Adhyaksha, Dawal and Kavya. With the help of these children, Shiva made Vyas's opinion famous. In the 24th Dwapar Yuga, he took birth as Valmiki, who is also known as Bihari. He composed the Purana by marrying the Vedas. When he did not succeed in spreading his opinion, then he praised Lord Shiva and requested for help from him. Shiva also took the form of Suli in the name of Mohan and fulfilled the wish of Vyas Ji. The names of his disciples were Sali Gotra, Sahaj Hote, Suhanvas and Shurua. Vyas Ji has described the Leela Charitra of Shri Ramchandra Ji. Hey Narada, in the 25th Dwapar Yuga, Vyas Ji was born in the Brahma word and by doing penance to Lord Shiva, he asked for his disciples from him. He prayed for help in propagating his faith. He had created Purana by dividing his stomach but when the worldly people did not accept his death, he was very disappointed. At that time, Shiv Ji took the form of Dandi Mandi. The names of his disciples were Bahul, Konkan, Kumbh and Prabhat. With their help, he got the prestige of Purana in the world and preached the path of Yoga to the worldly people. Among these, Bihar Ji's son was named Upmanyu. He had shown great devotion to Shiv Ji since childhood. O Nath, in the Dwapar era, Parashar was born as Byaaj Ji. He was my son and father of Basapan. There was no other great devotee of Shiv Ji like him. He created 18 Purana by dividing the Vedas. His faith was not propagated in the world. Then he prayed for help from Lord Sadashiv. At that time, Shiv Ji became kind and took incarnation in the name of Asha Vishnu to fulfill his desire and was established in a city named Bhadra Natak. The names of his disciples were Vasul Bindu Samaan and Vasullam. All these things were married with the permission of Shiv Ji. He helped Vyas and spread his faith in the world. Hey Narad, in the Dwapar era, Vyas Ji was born in the Gyan Kand and composed the Purana by marrying the Vedas. Then, seeing that his faith was not spreading, he praised Lord Shiva. At that time, Lord Shiva took incarnation in the Prabhat region with the name of Sahukarma. The names of his disciples were Akshaya Pad, Mannu Kumar Block and Utsah. He revealed the Yoga Shastra of the incarnation of Lord Shiva in the form of Saubhagya Karma and spread the importance of the Puranas and made the second religion famous. When Vyas Ji saw that no one was against his faith, he became happy and praised Lord Shiva. After this, the history of Bihari and his disciples has spread all over the world. In this way, I have described to you the 23 incarnations that took place with Lord Shiva in the Dwapar era. Now listen to that incarnation which Lord Shiva gave at the beginning of Kaliyug. Hey son, the person who listens to the story of these incarnations of Lord Shiva with full attention or tells it to others, both of them get destroyed. People find all kinds of joy in
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